1. अंबाजी मंदिर, बनासकांठा

    • स्थान: बनासकांठा जिला, राजस्थान-गुजरात सीमा के पास।
    • महत्व: 51 शक्ति पीठों में से एक, यह मंदिर माता अम्बा को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान यहाँ हजारों भक्त आते हैं और गरबा का आयोजन होता है।
    • विशेषता: मंदिर में मूर्ति नहीं है, बल्कि एक यंत्र की पूजा की जाती है।
  2. खोडियार माता मंदिर, राजपरा

    • स्थान: भावनगर के पास।
    • महत्व: खोडियार माता को समर्पित, यह सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रसिद्ध मंदिर है। नवरात्रि के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और गरबा का आयोजन किया जाता है।
    • विशेषता: मंदिर एक झील के किनारे स्थित है जो इसे एक शांत माहौल प्रदान करता है।
  3. बहुचर माता मंदिर, बेचराजी

    • स्थान: मेहसाणा जिला।
    • महत्व: यह मंदिर बहुचर माता को समर्पित है, जो साहस और सुरक्षा की देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि में यहां विशेष पूजा और गरबा का आयोजन होता है।
    • विशेषता: इस मंदिर में हिजड़ा समुदाय की विशेष आस्था है।
  4. चामुंडा माताजी मंदिर, चोटिला

    • स्थान: सुरेंद्रनगर जिला।
    • महत्व: यह मंदिर चोटिला की पहाड़ियों पर स्थित है और देवी चामुंडा को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान यहाँ भक्त सीढ़ियाँ चढ़कर देवी के दर्शन करते हैं।
    • विशेषता: मंदिर से चारों ओर का दृश्य अत्यंत आकर्षक है।
  5. पावागढ़ काली माता मंदिर, पंचमहल

    • स्थान: पावागढ़ पहाड़ी।
    • महत्व: यह मंदिर माँ काली को समर्पित है और एक शक्ति पीठ है। नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होते हैं।
    • विशेषता: मंदिर को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  6. उमिया माता मंदिर, उंझा

    • स्थान: मेहसाणा जिला।
    • महत्व: यह मंदिर कड़वा पाटीदार समुदाय की देवी उमिया माता को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान यहाँ गरबा और पूजा होती है।
    • विशेषता: उमिया माता को समृद्धि की देवी माना जाता है।
  7. श्री महाकाली माताजी मंदिर, पावागढ़

    • स्थान: वडोदरा के पास।
    • महत्व: यह मंदिर माँ महाकाली को समर्पित है और नवरात्रि में विशेष रूप से पूजा और गरबा का आयोजन होता है।
    • विशेषता: भक्त यहाँ सुरक्षा और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए आते हैं।