🕉️ क्या है श्रावण सोमवार व्रत?
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा व व्रत करने की परंपरा को श्रावण सोमवार व्रत कहते हैं। यह व्रत भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करता है, पापों का नाश करता है और जीवन में सुख-शांति लाता है।
🌼 व्रत का महत्व:
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सोमवार चंद्र ग्रह का दिन है और चंद्रमा पर भगवान शिव का अधिकार है।
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श्रावण मास में समुद्र मंथन के दौरान शिवजी ने विष पिया था, जिससे यह मास विशेष पवित्र बन गया।
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मान्यता है कि श्रावण में की गई पूजा का फल 108 गुना मिलता है।
📜 व्रत कथा (संक्षिप्त में):
एक गरीब ब्राह्मण दंपत्ति के कोई संतान नहीं थी। ऋषि के कहने पर उन्होंने श्रद्धा से श्रावण सोमवार का व्रत किया। भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर संतान का वरदान दिया। शीघ्र ही उनके जीवन में खुशहाली आ गई।
🛕 व्रत विधि:
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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शिवलिंग या शिव चित्र की स्थापना करें।
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दूध, दही, शहद, घी, शक्कर से अभिषेक करें।
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बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल चढ़ाएं।
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दीपक व धूप जलाएं।
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"ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जाप करें।
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व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
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निराहार, फलाहार या एक बार सात्विक भोजन लें।
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संध्या में पूजन के बाद व्रत पूर्ण करें।
📿 मंत्र:
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"ॐ नमः शिवाय"
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"महामृत्युंजय मंत्र"
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"शिव पंचाक्षरी स्तोत्र"
👩❤️👨 व्रत के लाभ:
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अविवाहित कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति हेतु व्रत करती हैं।
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दंपत्ति गृहस्थ सुख व संतान के लिए यह व्रत करते हैं।
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मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य व सभी विघ्नों से मुक्ति मिलती है।