गुरु नानक जयंती (जिसे गुरपुरब या गुरु नानक प्रकाश उत्सव के नाम से भी जाना जाता है) सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो गुरु नानक देव जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और दस सिख गुरुओं में से पहले गुरु थे। यह त्योहार आमतौर पर कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
महत्व: गुरु नानक देव जी को एक आध्यात्मिक नेता के रूप में पूजनीय माना जाता है, जिन्होंने एक ईश्वर, समानता, प्रेम, और मानवता की निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया। उनके उपदेश सिख धर्म के मुख्य सिद्धांतों का निर्माण करते हैं, जो सत्य, करुणा और विनम्रता पर जोर देते हैं। गुरु नानक जयंती केवल सिखों के लिए धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि उनके सार्वभौमिक संदेश पर चिंतन का भी दिन है।
रिवाज और उत्सव:
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अखंड पाठ: उत्सव की शुरुआत आमतौर पर गुरु ग्रंथ साहिब (सिखों का पवित्र ग्रंथ) के 48 घंटे के बिना रुके पाठ से होती है, जिसे अखंड पाठ कहा जाता है। यह सतत पाठ गुरुद्वारों और घरों में किया जाता है और गुरु नानक जयंती के दिन समाप्त होता है।
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प्रभात फेरियां: सुबह के समय प्रभात फेरी निकाली जाती है, जिसमें भक्तगण गुरु नानक देव जी की स्तुति में भजन और कीर्तन गाते हैं। ये प्रभात फेरियां गुरुद्वारा से शुरू होकर शहर या कस्बे के विभिन्न हिस्सों से गुजरती हैं।
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नगर कीर्तन: गुरु नानक जयंती से एक दिन पहले नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है। यह एक धार्मिक जुलूस होता है जिसमें पंज प्यारे (पाँच प्यारे) नेतृत्व करते हैं। वे सिख ध्वज (निशान साहिब) और गुरु ग्रंथ साहिब को एक सजे हुए पालकी में ले जाते हैं। जुलूस के दौरान भक्तगण भक्ति गीत गाते हैं और मार्शल आर्ट (गटका) का प्रदर्शन करते हैं।
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कथा और कीर्तन: गुरु नानक जयंती के दिन विशेष कथा (धार्मिक कथन) और कीर्तन (भजन गायन) के कार्यक्रम गुरुद्वारों में आयोजित किए जाते हैं। गुरु नानक देव जी के जीवन और शिक्षाओं का पाठ किया जाता है और उन्हें भक्तों के सामने समझाया जाता है।
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लंगर: त्योहार में लंगर (सामुदायिक भोजन) का भी आयोजन किया जाता है, जो सभी के लिए खुला होता है, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म या सम्प्रदाय के हों। यह गुरु नानक देव जी की समानता और सामुदायिक सेवा की शिक्षाओं को दर्शाता है।
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रोशनी और सजावट: गुरुद्वारों और घरों को रोशनी से सजाया जाता है, और विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं। पूरे दिन भक्ति और आध्यात्मिकता का माहौल बना रहता है।
सांस्कृतिक प्रभाव: गुरु नानक जयंती न केवल सिखों द्वारा बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों द्वारा भी मनाई जाती है, जो गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का सम्मान करते हैं। यह त्योहार खुशी, चिंतन और सामुदायिक सद्भाव का समय है, जो शांति और एकता का संदेश फैलाता है।