शरद पूर्णिमा हिंदू त्योहार है जो आश्वयुज मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर में पड़ता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा या कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है।

महत्व: शरद पूर्णिमा का पर्व मानसून के मौसम के अंत और फसल के मौसम की शुरुआत का संकेत है। यह दिन चंद्र देव की पूजा से जुड़ा हुआ है और इसे शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की चांदनी को विशेष रूप से शक्तिशाली और औषधीय माना जाता है।

रिवाज:

  1. चंद्रमा पूजा: शरद पूर्णिमा पर भक्त चंद्र देव की विशेष पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस रात की चांदनी विशेष रूप से प्रभावशाली होती है और इसमें उपचारात्मक गुण होते हैं। भक्त अक्सर रातभर जागकर पूजा और अनुष्ठान करते हैं।

  2. खीर की तैयारी: एक पारंपरिक रिवाज के अनुसार, विशेष रूप से खीर (मिठा चावल का खीर) तैयार किया जाता है। खीर को चांदनी में रातभर रखा जाता है। माना जाता है कि चांदनी इसके स्वाद और पोषक तत्वों को बढ़ा देती है।

  3. उपवासी और जागरण: कई भक्त उपवास रखते हैं और रातभर जागते हैं ताकि चंद्र देव की पूजा कर सकें। वे प्रार्थना, भजन, और धार्मिक प्रवचन में भाग लेते हैं।

  4. उत्सवी भोज: पूजा के बाद, परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर उत्सवी भोजन का आनंद लेते हैं। चांदनी में रखा गया खीर परिवार और दोस्तों के साथ बांटा जाता है।

उजवणी: शरद पूर्णिमा भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह पारिवारिक मिलन, विशेष प्रार्थनाओं, और पारंपरिक खाद्य पदार्थों का समय होता है। यह त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में मनाया जाता है, जहां विभिन्न स्थानीय परंपराओं और रिवाजों के साथ इसका उत्सव होता है।