परिचय
31 दिसंबर 2025 को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर की दूसरी प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ का भव्य महोत्सव मनाया गया। इस वर्षगांठ को प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। हालांकि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी, पर हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि इस दिन पड़ती है।
प्रतिष्ठा समारोह 27 दिसंबर से 2 जनवरी 2026 तक चले, जिसमें 31 दिसंबर को मुख्य अनुष्ठान हुए।
1. मंडल पूजा और हवन: पूजा-पाठ और हवन से मंदिर परिसर को पवित्र किया गया।
2. पंचमृत एवं पंच रस अभिषेक: रामलला की प्रतिमा को पंचमृत और पंच रस से अभिषेक किया गया।
3. भजन-कीर्तन और संगीत: रामचरितमानस का पाठ और भजन से वातावरण भक्तिमय रहा।
4. ध्वजारोहण: मुख्य मंदिर और सात उप-मंदिरों पर पवित्र ध्वज फहराया गया।
5. सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: रामलीला, नृत्य-नाट्य और रामायण आधारित कार्यक्रमों से चारों ओर उत्सव का वातावरण बना रहा।
प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का मतलब है — भक्ति और दिव्यता के बीच प्रत्यक्ष मिलन, जो भगवान श्रीराम को प्रतिमा में पूर्ण रूप से स्थापित करता है।
भक्तों के लिए यह अवसर आत्म-शांति, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का प्रेरक स्रोत है।
पिछले 10 दिनों में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने अयोध्या में दर्शन किए, और अगले कुछ दिनों में भी भारी भीड़ अपेक्षित थी।
भक्तों ने निर्झरित भाव से ‘जय श्रीराम’ का उच्चारण किया और प्रार्थना तथा आरती में भाग लिया, जिससे दृश्य अत्यंत दिव्य और भाव-भीना था।
दूसरी प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ ने भक्त समुदाय को फिर से एकत्र किया और यह दिखाया कि भगवान राम की आस्था आज भी लाखों दिलों को जोड़ती है — धर्म, संस्कृति और भक्ति की एकता का प्रतीक बनकर।
जय श्री राम! 🙏