दिवाली 2026: तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, 5 दिन, पूजा विधि, महत्व और उत्सव
दिवाली 2026 हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इसे दीपावली या दीपों का त्योहार भी कहा जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना जाता है।
दिवाली के अवसर पर लोग अपने घरों की सफाई और सजावट करते हैं, दीपक जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और शाम के समय मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन मुख्य रूप से लक्ष्मी पूजा की जाती है।
गुजरात में दिवाली का विशेष महत्व है। यहां दिवाली के आसपास धनतेरस, काली चौदस, लक्ष्मी पूजा, चोपड़ा पूजन, गुजराती नववर्ष (बेस्टु वरस), भाई बीज और लाभ पंचम जैसे पर्व मनाए जाते हैं।
नोट: पूजा मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है। नीचे दिया गया लक्ष्मी पूजा मुहूर्त मुख्य रूप से अहमदाबाद, गुजरात के लिए है।
दिवाली 2026 कब है?
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।
दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। 2026 में अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।
दिवाली की मुख्य पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है।
दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
दिवाली पर सबसे महत्वपूर्ण पूजा मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है।
अहमदाबाद में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त:
शाम 6:22 बजे से रात 8:20 बजे तक
अवधि: लगभग 1 घंटा 58 मिनट
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। स्थिर लग्न के अनुसार 2026 में वृषभ लग्न का समय भी शाम के समय आता है।
महत्वपूर्ण: अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और लग्न के समय में अंतर होने के कारण लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त अलग हो सकता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम मुहूर्त की पुष्टि करें।
दिवाली 2026 की 5 प्रमुख तिथियां
दिवाली को सामान्यतः पांच दिनों का प्रमुख त्योहार माना जाता है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इन दिनों के नाम और पूजा की परंपराओं में थोड़ा अंतर हो सकता है।
| दिन | पर्व | तारीख | दिन |
|---|---|---|---|
| पहला दिन | धनतेरस | 6 नवंबर 2026 | शुक्रवार |
| दूसरा दिन | नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली | 7 नवंबर 2026 | शनिवार |
| तीसरा दिन | दिवाली / लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर 2026 | रविवार |
| चौथा दिन | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | 9 नवंबर 2026 | सोमवार |
| पांचवां दिन | भाई दूज | 11 नवंबर 2026 | बुधवार |
2026 में गुजरात में दिवाली के बाद गुजराती नववर्ष (बेस्टु वरस) 9 नवंबर को मनाया जाएगा।
दिवाली का धार्मिक महत्व
दिवाली केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं है। इसका गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
1. भगवान राम की अयोध्या वापसी
हिंदू परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटे थे।
अयोध्यावासियों ने भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वागत में दीप जलाए थे। इसी परंपरा से दीपावली को दीपों के त्योहार के रूप में मनाने की मान्यता जुड़ी है।
2. अंधकार पर प्रकाश की विजय
दीपक प्रकाश का प्रतीक है। दिवाली हमें अज्ञान, नकारात्मकता और अंधकार को दूर करके ज्ञान और सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश देती है।
3. मां लक्ष्मी की पूजा
दिवाली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करके परिवार में सुख, समृद्धि, धन और शांति की कामना की जाती है।
4. भगवान गणेश की पूजा
लक्ष्मी पूजा के साथ भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, सफलता और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है।
5. नई शुरुआत
दिवाली को नई शुरुआत और सकारात्मक परिवर्तन का अवसर भी माना जाता है।
दिवाली के पांच दिनों का महत्व
पहला दिन – धनतेरस 2026
6 नवंबर 2026, शुक्रवार
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह दिवाली उत्सव का महत्वपूर्ण प्रारंभिक दिन है।
इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। कई परिवार धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना से पूजा करते हैं।
धनतेरस पर परंपरागत रूप से लोग खरीदारी भी करते हैं, जैसे:
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सोना
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चांदी
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आभूषण
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बर्तन
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घर की उपयोगी वस्तुएं
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व्यापार से संबंधित वस्तुएं
दूसरा दिन – नरक चतुर्दशी / काली चौदस
7 नवंबर 2026, शनिवार
नरक चतुर्दशी को कई स्थानों पर काली चौदस या छोटी दिवाली भी कहा जाता है।
यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से जुड़ा हुआ माना जाता है।
गुजरात में काली चौदस का विशेष महत्व है और कई परिवार इस दिन विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं।
तीसरा दिन – दिवाली और लक्ष्मी पूजा
8 नवंबर 2026, रविवार
यह दिवाली का मुख्य दिन है।
इस दिन लोग:
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घर की सफाई करते हैं
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रंगोली बनाते हैं
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दीपक जलाते हैं
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घर सजाते हैं
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लक्ष्मी-गणेश पूजा करते हैं
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मिठाइयां बांटते हैं
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परिवार और मित्रों से मिलते हैं
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नए कपड़े पहनते हैं
व्यापारी और व्यवसायी समुदाय इस दिन चोपड़ा पूजन भी करते हैं।
चौथा दिन – गोवर्धन पूजा
9 नवंबर 2026, सोमवार
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को भारी वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था।
इस दिन कई मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन किया जाता है।
अन्नकूट में अनेक प्रकार के भोजन भगवान को भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं।
क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा और गुजराती नववर्ष की तारीखों में कभी-कभी अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।
गुजराती नववर्ष 2026 – बेस्टु वरस
गुजरात में दिवाली के बाद गुजराती नववर्ष, जिसे बेस्टु वरस कहा जाता है, विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।
बेस्टु वरस 2026: सोमवार, 9 नवंबर 2026
इस दिन लोग एक-दूसरे को:
"साल मुबारक"
कहकर शुभकामनाएं देते हैं।
लोग मंदिर जाते हैं, परिवार और मित्रों से मिलते हैं तथा बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
व्यापारिक समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है और नए व्यापारिक वर्ष की शुरुआत से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं।
भाई दूज 2026
11 नवंबर 2026, बुधवार
भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का त्योहार है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनके सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं।
भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।
अहमदाबाद के पंचांग के अनुसार 2026 में भाई दूज का तिलक समय लगभग दोपहर 1:30 बजे से 3:43 बजे तक है।
दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि
दिवाली के दिन शाम को घर में लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है।
1. घर की सफाई करें
दिवाली से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें।
परंपरा के अनुसार साफ और व्यवस्थित घर मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
2. घर को सजाएं
मुख्य दरवाजे पर:
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रंगोली
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तोरण
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फूल
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दीपक
से सजावट करें।
3. पूजा स्थान तैयार करें
एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
उस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
4. कलश स्थापित करें
कलश में स्वच्छ जल भरें और उसमें आम के पत्ते तथा नारियल स्थापित करें।
5. दीपक जलाएं
घी या तेल का दीपक जलाएं।
घर के मुख्य दरवाजे, खिड़कियों और पूजा स्थल पर भी दीपक रखे जा सकते हैं।
6. भगवान गणेश की पूजा करें
सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें और उनसे सभी विघ्न दूर करने की प्रार्थना करें।
7. मां लक्ष्मी की पूजा करें
मां लक्ष्मी को:
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फूल
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कुमकुम
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अक्षत
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फल
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मिठाई
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धूप
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दीप
अर्पित करें।
8. धन और व्यापारिक सामग्री की पूजा
दिवाली पर व्यापारी वर्ग में धन, तिजोरी, खाता-बही और व्यापार से संबंधित वस्तुओं की पूजा करने की परंपरा है।
9. आरती करें
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें।
10. प्रसाद बांटें
पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सदस्यों और उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित करें।
दिवाली पूजा सामग्री
लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री उपयोग की जाती है:
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मां लक्ष्मी की मूर्ति
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भगवान गणेश की मूर्ति
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पूजा चौकी
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लाल कपड़ा
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कलश
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नारियल
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आम के पत्ते
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कुमकुम
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हल्दी
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अक्षत
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फूल
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माला
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धूप
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अगरबत्ती
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कपूर
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घी
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तेल
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दीपक
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रुई की बत्ती
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फल
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मिठाई
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पंचामृत
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पान
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सुपारी
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सिक्के
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नई खाता-बही
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रंगोली की सामग्री
पूजा सामग्री परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
चोपड़ा पूजन क्या है?
चोपड़ा पूजन गुजरात के व्यापारिक समुदाय में दिवाली का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है।
इसमें नई खाता-बही और व्यापारिक पुस्तकों की पूजा की जाती है।
आज के डिजिटल युग में कई व्यापारी पारंपरिक खाता-बही के साथ कंप्यूटर, अकाउंटिंग सिस्टम और अन्य व्यावसायिक रिकॉर्ड को भी प्रतीकात्मक रूप से पूजते हैं।
चोपड़ा पूजन का उद्देश्य नए व्यापारिक वर्ष में:
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सफलता
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समृद्धि
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अच्छे व्यापार
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आर्थिक स्थिरता
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भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद
प्राप्त करना माना जाता है।
2026 में चोपड़ा पूजन के लिए विभिन्न शुभ चोघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं।
दिवाली में दीपक क्यों जलाए जाते हैं?
दिवाली को प्रकाश का त्योहार कहा जाता है।
दीपक जलाने का आध्यात्मिक अर्थ है:
अंधकार पर प्रकाश की विजय।
यह हमारे जीवन से:
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अज्ञान
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नकारात्मकता
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भय
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निराशा
दूर करके ज्ञान, सकारात्मकता और आशा की ओर बढ़ने का संदेश देता है।
दिवाली की सजावट
दिवाली पर घर की सजावट का विशेष महत्व है।
रंगोली
मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाना शुभ माना जाता है।
लोकप्रिय रंगोली डिजाइनों में शामिल हैं:
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कमल
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मोर
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दीपक
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स्वस्तिक
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ॐ
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फूलों की डिजाइन
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ज्यामितीय डिजाइन
मिट्टी के दीये
मिट्टी के पारंपरिक दीयों का उपयोग दिवाली की सुंदरता को बढ़ाता है।
फूलों की सजावट
गेंदे के फूल और अन्य फूलों से दरवाजे और पूजा स्थान को सजाया जा सकता है।
लाइटिंग
घर की बालकनी, खिड़कियों और मुख्य दरवाजे को LED लाइट्स से सजाया जा सकता है।
दिवाली के पारंपरिक व्यंजन
दिवाली मिठाइयों और स्वादिष्ट पकवानों के बिना अधूरी मानी जाती है।
लोकप्रिय दिवाली मिठाइयां और स्नैक्स:
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काजू कतली
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मोहनथाल
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घुघरा
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चकली
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मठिया
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चिवड़ा
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शंकरपाड़ा
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बेसन लड्डू
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मोतीचूर लड्डू
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जलेबी
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फाफड़ा
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सूखे मेवे
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नमकीन
गुजरात में परिवार दिवाली के अवसर पर विशेष गुजराती मिठाइयां और फरसाण तैयार करते हैं।
दिवाली पर उपहार देने की परंपरा
दिवाली के अवसर पर परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों और व्यापारिक सहयोगियों को उपहार देने की परंपरा है।
लोकप्रिय दिवाली उपहार:
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मिठाई
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ड्राई फ्रूट्स
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चॉकलेट
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चांदी के सिक्के
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सजावटी दीये
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गिफ्ट हैम्पर
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पौधे
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पारंपरिक हस्तशिल्प
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घर की सजावट की वस्तुएं
उपयोगी और पर्यावरण-अनुकूल उपहार चुनना भी एक अच्छा विकल्प है।
पर्यावरण-अनुकूल दिवाली 2026 कैसे मनाएं?
दिवाली को खुशी के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए मनाया जा सकता है।
1. मिट्टी के दीयों का उपयोग करें
प्लास्टिक की सजावट की जगह पारंपरिक मिट्टी के दीये इस्तेमाल करें।
2. LED लाइट्स का उपयोग करें
सजावट के लिए ऊर्जा-कुशल LED लाइट्स का इस्तेमाल करें और आवश्यकता न होने पर उन्हें बंद कर दें।
3. पटाखों का सीमित उपयोग करें
पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण होता है। इसलिए पटाखों का उपयोग कम करें और स्थानीय नियमों का पालन करें।
4. प्राकृतिक रंगोली बनाएं
फूलों, चावल और प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाएं।
5. प्लास्टिक कम करें
सजावट और पार्टी में सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करें।
6. भोजन की बर्बादी रोकें
जरूरत के अनुसार ही भोजन बनाएं और अतिरिक्त भोजन को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करें।
7. जरूरतमंदों की मदद करें
दिवाली पर मिठाई, कपड़े, भोजन या उपयोगी वस्तुएं जरूरतमंद लोगों को दान करें।
दिवाली के दौरान सुरक्षा के उपाय
दिवाली मनाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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दीपक को पर्दे और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
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जलते हुए दीये को कभी अकेला न छोड़ें।
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बच्चों को आग और पटाखों से दूर रखें।
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घर में प्राथमिक अग्निशमन व्यवस्था रखें।
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पटाखों का उपयोग खुले स्थान पर करें।
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स्थानीय पटाखा नियमों का पालन करें।
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पालतू जानवरों का ध्यान रखें।
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सिंथेटिक और ढीले कपड़ों से सावधान रहें।
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बिजली की सजावट में खराब तारों का उपयोग न करें।
दिवाली 2026 – एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| त्योहार | दिवाली / दीपावली |
| वर्ष | 2026 |
| मुख्य दिवाली | 8 नवंबर 2026 |
| दिन | रविवार |
| मुख्य पूजा | लक्ष्मी-गणेश पूजा |
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – अहमदाबाद | 6:22 PM – 8:20 PM |
| धनतेरस | 6 नवंबर 2026 |
| नरक चतुर्दशी | 7 नवंबर 2026 |
| दिवाली | 8 नवंबर 2026 |
| गोवर्धन पूजा | 9 नवंबर 2026 |
| गुजराती नववर्ष | 9 नवंबर 2026 |
| भाई दूज | 11 नवंबर 2026 |
| लाभ पंचम | 14 नवंबर 2026 |
| प्रमुख प्रतीक | दीपक / प्रकाश |
| गुजरात की विशेष परंपरा | चोपड़ा पूजन और बेस्टु वरस |
अहमदाबाद के लिए लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त 8 नवंबर 2026 को शाम 6:22 से रात 8:20 बजे तक है।
दिवाली 2026 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली 2026 कब है?
दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा कब है?
लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026 की शाम को की जाएगी।
अहमदाबाद में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?
अहमदाबाद में लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 6:22 बजे से रात 8:20 बजे तक है।
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है।
नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
नरक चतुर्दशी/काली चौदस शनिवार, 7 नवंबर 2026 को है।
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है। क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार आयोजन में अंतर हो सकता है।
गुजराती नववर्ष 2026 कब है?
गुजराती नववर्ष यानी बेस्टु वरस सोमवार, 9 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
भाई दूज 2026 कब है?
भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
दिवाली पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कुछ परिवारों में मां सरस्वती, भगवान कुबेर और अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है।
दिवाली क्यों मनाई जाती है?
दिवाली को मुख्य रूप से प्रकाश की अंधकार पर, अच्छाई की बुराई पर और ज्ञान की अज्ञान पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है।
चोपड़ा पूजन क्या है?
चोपड़ा पूजन गुजरात में व्यापारियों द्वारा दिवाली के अवसर पर नई खाता-बही और व्यापारिक रिकॉर्ड की पूजा करने की परंपरा है। इसका उद्देश्य नए व्यापारिक वर्ष के लिए समृद्धि और सफलता की कामना करना है।
निष्कर्ष
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि और सफलता के लिए प्रार्थना की जाती है।
अहमदाबाद में लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 6:22 बजे से रात 8:20 बजे तक है।
दिवाली के आसपास धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा, गुजराती नववर्ष और भाई दूज जैसे पर्व मनाए जाते हैं।
गुजरात में चोपड़ा पूजन और बेस्टु वरस दिवाली उत्सव को विशेष सांस्कृतिक पहचान देते हैं।
आइए इस दिवाली अपने घर को दीपों से रोशन करने के साथ-साथ अपने जीवन में ज्ञान, सकारात्मकता, प्रेम, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाएं।
आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।