रावण – भगवान शिव का राक्षस भक्त
परिचय:
रावण, लंका का राक्षस राजा, अक्सर रामायण के खलनायक के रूप में जाना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह भगवान शिव का परम भक्त भी था। उसकी भक्ति अत्यंत तीव्र, अभिमान से भरी लेकिन सच्ची थी।
कहानी:
रावण का जन्म ऋषि विश्रवा और राक्षसी कैकसी से हुआ था। वह अत्यंत विद्वान, वेदों का ज्ञाता और संगीत का ज्ञानी था। रावण भगवान शिव की उपासना करता था और कठोर तप करता था।
एक बार उसने कैलाश पर्वत को लंका ले जाने का प्रयास किया। भगवान शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबा दिया, जिससे रावण उसके नीचे फंस गया। दर्द में भी रावण ने क्षमा नहीं मांगी, बल्कि भगवान शिव की स्तुति करते हुए शिव तांडव स्तोत्र की रचना की।
भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उसे चंद्रहास नामक दिव्य खड्ग प्रदान किया।
भावार्थ:
रावण की कथा यह सिखाती है कि भले ही कोई व्यक्ति दोषों से युक्त हो, अगर भक्ति सच्ची हो तो भगवान कृपा अवश्य करते हैं।
विरासत:
रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र आज भी शिव भक्तों द्वारा श्रद्धा से पढ़ा जाता है। यह उसकी गहरी शिव भक्ति का प्रतीक है।