चामुंडी शक्तिपीठ – कर्नाटक (सती जी का मुख)
परिचय
कर्नाटक में स्थित चामुंडी शक्तिपीठ भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ पर माता सती का मुख (चेहरा) गिरा था। इस स्थान पर माता को चामुंडेश्वरी देवी के रूप में पूजा जाता है, जो शक्ति, साहस और रक्षण की प्रतीक हैं।
पौराणिक महत्व
दक्ष यज्ञ कथा के अनुसार, जब माता सती ने यज्ञ में आत्मदाह कर लिया, तब भगवान शिव अत्यंत दुखी होकर उनका शरीर लेकर घूमने लगे। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया। जहाँ-जहाँ उनके अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। चामुंडी शक्तिपीठ वह पवित्र स्थान है जहाँ माता का मुख गिरा था, जो दिव्य दृष्टि और शक्ति का प्रतीक है।
स्थान और महत्व
यह शक्तिपीठ कर्नाटक के मैसूर में चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित है। चामुंडेश्वरी देवी मैसूर की अधिष्ठात्री देवी हैं और यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मैसूर का प्रसिद्ध दशहरा उत्सव भी देवी चामुंडी से ही जुड़ा हुआ है।
पूजा-पाठ और त्यौहार
-
भक्त देवी को नारियल, लाल फूल, हल्दी और सिंदूर अर्पित करते हैं।
-
यहाँ नवरात्रि और दशहरा बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं।
-
विशेष यज्ञ, दुर्गा सप्तशती का पाठ और संध्या आरती से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
निष्कर्ष
कर्नाटक का चामुंडी शक्तिपीठ शक्ति, साहस और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ दर्शन करने से श्रद्धालुओं को माता के आशीर्वाद और शक्ति की अनुभूति होती है।