परिचय
शीतला शक्तिपीठ, हरियाणा में स्थित, माँ शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती का मुख गिरा था जब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण कर रहे थे।
पौराणिक महत्व
शक्तिपीठों की कथा माता सती और भगवान शिव से जुड़ी हुई है। दक्ष यज्ञ में आत्मदाह करने के बाद, भगवान शिव शोकग्रस्त होकर माता सती के शरीर को लेकर घूमने लगे। तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया। जहाँ-जहाँ उनके अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुए। हरियाणा में जहाँ सती का मुख गिरा था, वह स्थान शीतला शक्तिपीठ कहलाता है।
मंदिर का महत्व
यहाँ माता को शीतला देवी के रूप में पूजा जाता है। वे शुद्धता, स्वास्थ्य और मातृत्व की देवी मानी जाती हैं। मान्यता है कि माता शीतला भक्तों को रोगों, विशेषकर त्वचा और संक्रामक बीमारियों से बचाती हैं। यहाँ आस्था और श्रद्धा से किए गए दर्शन से भक्तों को मानसिक और शारीरिक बल प्राप्त होता है।
त्योहार और उत्सव
यहाँ नवरात्रि, विशेषकर चैत्र नवरात्रि पर, भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त माता को पुष्प, जल, मिठाई और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। विशेष अनुष्ठान कर स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
निष्कर्ष
शीतला शक्तिपीठ, हरियाणा केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि माँ शक्ति की करुणा और उनकी रक्षा करने वाली शक्ति का प्रतीक है। यहाँ आने वाला हर भक्त शांति, स्वास्थ्य और माँ के आशीर्वाद की प्राप्ति करता है।