क्षेत्रपालिका शक्तिपीठ – बिहार (सती जी का वक्षस्थल)
परिचय
बिहार में स्थित क्षेत्रपालिका शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ माता सती का वक्षस्थल (छाती) गिरा था। यहाँ माता को क्षेत्रपालिका माता के रूप में पूजा जाता है, जो भूमि और भक्तों की रक्षक मानी जाती हैं।
पौराणिक महत्व
दक्ष यज्ञ कथा के अनुसार जब माता सती ने यज्ञ स्थल पर अपने प्राण त्याग दिए, तो शिवजी शोक में उनका शरीर लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया। जहाँ-जहाँ उनके अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ की स्थापना हुई। बिहार का यह शक्तिपीठ उस स्थान को दर्शाता है जहाँ माता का वक्षस्थल गिरा था, जो मातृत्व, पोषण और रक्षा का प्रतीक है।
स्थान और महत्व
यह शक्तिपीठ बिहार राज्य में स्थित है, जो प्राचीन संस्कृति और आस्था से भरा हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। विशेषकर नवरात्रि के समय यहाँ का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। बिहार की धरती, जो बौद्ध और वैदिक परंपराओं से प्रसिद्ध है, इस शक्तिपीठ से देवी शक्ति की गाथा भी जोड़ती है।
पूजा-पाठ और त्यौहार
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भक्त लाल फूल, सिंदूर और मिठाई माता को अर्पित करते हैं।
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नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ और अखंड कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।
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विशेष हवन और यज्ञ द्वारा भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं।
निष्कर्ष
बिहार का क्षेत्रपालिका शक्तिपीठ आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ दर्शन करने से भक्तों को माता की शक्ति और करुणा का सीधा अनुभव प्राप्त होता है।